अगली तिमाही से महंगाई में तेजी से गिरावट संभव
बजट के बाद RBI ने पहली बार पॉलिसी रेट की समीक्षा की है। RBI और मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने रेपो रेट (Repo Rate) में कोई बदलाव नहीं किया है। फिस्कल ईयर 2020 में महंगाई बढ़ने की वजह से RBI ने रेपो रेट को जस का तस बनाए रखा है। रेपो रेट पहले की तरह बिना किसी बदलाव के 5.15 फीसदी पर बनी हुई है। पॉलिसी के बाद RBI ने कहा कि बैंकों को और कर्ज मुहैया कराने की जरूरत है। इस पर नजर बनी हुई है। FY21 में सरकारी उधारी घट सकती है। फॉरेक्स फ्लो पर भी लगातार नजर बनी हुई है।
उन्होंने आगे कहा कि पॉलिसी ट्रांसमिशन के लिए Operation Twist चलाया जा रहा है। 2019 की तरह इस साल भी Pro-Active रहेंगे। उन्होंने आगे कहा कि दरों में कटौती कब होगी कहना मुश्किल लेकिन ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश बरकरार है। अगली तिमाही से महंगाई में तेजी से गिरावट संभव है। महंगाई और बढ़ने की उम्मीद नहीं है। लिक्विडिटी मैनेजमेंट फ्रेमवर्क में बदलाव जारी है। बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त लिक्विडिटी रखेंगे। 15 फरवरी से 1, 3 साल का टर्म रेपो शुरू किया जाएगा।
उन्होंने आगे कहा कि छोटी बचत योजना दरों में बदलाव की जरूरत है। ग्रोथ में सुस्ती संभालने के लिए आगे कई कदम संभव हैं। रेपो रेट के अलावा दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। दरों में आगे बदलाव मुमकिन है। दिसंबर तक ग्लोबल इकोनॉमी में धीमापन दिखा । लेकिन अब इसमें सुधार के संकेत दिख रहे हैं। देश में सरकारी खर्च से ग्रोथ को सहारा देने पर फोकस किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नए ग्राहकों के लिए CRR में छूट 31 जुलाई तक रहेगी। इकोनॉमी पर Coronavirus के असर का आकलन जारी है।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि महंगाई दर को लेकर सरकार काफी सतर्क है। Jan-March में प्याज की कीमतें और घट सकती हैं। आर्थिक गतिविधियों में भी धीमापन बरकरार है। ग्रोथ बढ़ाने के लिए Accommodative रुख बरकरार है। उन्होंने आगे कहा कि निजी खपत से अगले वित्तवर्ष में सुधार संभव है। निवेश में सुधार के संकेत दिख रहे हैं। आरबीआई गवर्नर के मुताबिक आरबीआई गवर्नर बजट से पावर, सीमेंट, एविएशन और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को मदद मिलेगी। कम कॉरपोरेट टैक्स से लिस्टेड कंपनियों को लाभ होगा।